एक ख्वाब से आजादी ..

नुकीले ख्वाब थे कुछ
बहुत आँखों में चुभ रहे थे
रात तकिये के तले रख के , थपकियाँ देकर
सुला दिया था उन्हें ।
चंद बातें थीं
जिनके सब मतलब
पिछली बारिश में धुल गये थे ।
कई यादें थीं तेरी
सूखे हुए ठूंठों की तरह
हर उम्मीद तेरे होने की दम तोड़ चकी थी
मैं ऊब गया था
बहुत थक भी गया था ।
बेड़ियाँ खोल दीं कल रात तंग आके मैंने
ख़्वाबों की , यादों की , तेरी बातों की
अब हैं आज़ाद तेरे ख़्वाबों की तनहा रातें
बातें , यादें , तेरे सब ख्वाब
अब तलक सोये हुए हैं
सिर्फ मैं जाग गया हूँ ।।
               नजम

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