बापू के नाम ...
आदरणीय बापू !
हम सुनते आए थे कि भारत की आत्मा गांधी है। भारत में गांधी नहीं बल्कि गांधी में भारत है । लेकिन अब आपकी आत्मा ने ही आपको मार डाला है । भारत आपको जीवित नहीं रख सका । अपने इसी कुकर्म पर पर्दा डालने के लिए इसने आपको भगवान बना दिया है । मतलब आपको बेदखल किया गया है भारत से । सही शब्दों में एक अंतहीन बनवास दिया गया है आपको । मुझे लगता है और शायद आपको भी लगता हो कि यह सज़ा उन गोलियों से भी बड़ी सख़्त है जिन्होंने आपकी सांसों का अंत किया था । नुक्कड़ , चौराहों पर आपको देखकर नज़रें नीची कर लेता हूं । मैंने देखा है कि स्कूल टूर में भी हमें राजघाट ले जाया जाता था बिड़ला भवन नहीं । इसलिए कि कहीं ऐसा ना हो आप हमसे कोई सवाल पूछ लें । हम सत्य के प्रयोगों से घबराने लगे हैं , अहिंसा की रिवायतें आपकी किताबों के पन्नों में दफन कर दी गई हैं । आपके तीनों बंदरों का दिन रात मज़ाक उड़ाया जाता है। मगर आप खामोश हैं ।
भारत में दो प्रकार के लोग हैं एक वह जिनकी श्रृद्धा है आपमें , दूसरे वह जो आपसे घृणा रखते हैं । यह दोनों ही आपके और आपके सिद्धांतो के शत्रु हैं । इन दोनों ने मिलकर ही आपको राजनीतिक बनवास दिया है । इसलिए शायद आप कहीं नज़र नहीं आते । राजनीति , समाज , आर्थिक नीतियां सब आपसे खाली हैं । आप ' मन ' में नहीं ' बातों ' में हैं । भारत यानी आपकी आत्मा एक सत्याग्रह चाहती है । आंतरिक सत्याग्रह ! स्वच्छ भारत अभियान तभी कामयाब होगा ।
बाक़ी सब ठीकै है ।।।
आपकी आत्मा का एक विचलित अंश ।
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