प्रतीक्षा में !!! Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 08, 2018 बहुत दिनों से मैं ऐसी शामों का मुन्तजिर हूं जहां पे शब्दों के दो किनारे मेरी कविता की धारा बन कर तेरी आंखों से बह पड़ें । सड़क पे चलते ख़्याल सारे जिनकी पेशानियों में बल पड़... Read more