Posts

Showing posts from January, 2019

प्रकृति का लेखक लड़का

वह एक लड़का जिसकी दुनिया आसमां से ज़रा बड़ी थी जहां ना राजा की सरकशी थी और ना प्रजा की थी बगावत ना थे जहां सरहदी घरौंदे जातियों के ना थे बखेड़े वहां के बाज़ार प्रेम के सिक्कों पे चलते वहां के शहरी एक प्यारी सी मुस्कुराहट में जो भी चाहते खरीद लेते रोशनियां ठेलों पे बिकती सब्ज़ियों की तरह लगी थीं वहां पे कुछ बनावटी नहीं था खुदा भी एक दम ओरिजिनल था । उतर के जब वह ज़मीं पे आया यहां की कड़वी हवाओं में जब पहली बार उसने सांस ली तो उसकी रूह के सफेद जुगनू कराह उठे थे। उसे यहां सब अजब लगा था बनावटी था प्यार यां का दोयम दर्जे की भावनाएं आदमी एक आंकड़ा था पूरी दुनिया मोटी मोटी सरहदों में बंटी हुई थी जिनकी रक्षा ही धर्म होता । सरहदों के बाद भी वां कई हदे थीं । जुर्म था जिनसे निकल कर सोचना कुछ बोलना । वह एक लड़का जिसकी ज़िद थी रोशनी और गुलाब बोना । वह एक लड़का जिसकी ज़िद थी प्रकृति की मांग भरना उसकी सूखी हथेलियों में ज़िन्दगी के रंग बोना । अजीब ज़िद थी कि जिसके नीचे दबा हुआ था । वह अब नहीं है पर उसकी सांसों में प्रकृति सांस ले रही है ।।।