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प्रकृति का लेखक लड़का

वह एक लड़का जिसकी दुनिया आसमां से ज़रा बड़ी थी जहां ना राजा की सरकशी थी और ना प्रजा की थी बगावत ना थे जहां सरहदी घरौंदे जातियों के ना थे बखेड़े वहां के बाज़ार प्रेम के सिक्कों पे चलते वहां के शहरी एक प्यारी सी मुस्कुराहट में जो भी चाहते खरीद लेते रोशनियां ठेलों पे बिकती सब्ज़ियों की तरह लगी थीं वहां पे कुछ बनावटी नहीं था खुदा भी एक दम ओरिजिनल था । उतर के जब वह ज़मीं पे आया यहां की कड़वी हवाओं में जब पहली बार उसने सांस ली तो उसकी रूह के सफेद जुगनू कराह उठे थे। उसे यहां सब अजब लगा था बनावटी था प्यार यां का दोयम दर्जे की भावनाएं आदमी एक आंकड़ा था पूरी दुनिया मोटी मोटी सरहदों में बंटी हुई थी जिनकी रक्षा ही धर्म होता । सरहदों के बाद भी वां कई हदे थीं । जुर्म था जिनसे निकल कर सोचना कुछ बोलना । वह एक लड़का जिसकी ज़िद थी रोशनी और गुलाब बोना । वह एक लड़का जिसकी ज़िद थी प्रकृति की मांग भरना उसकी सूखी हथेलियों में ज़िन्दगी के रंग बोना । अजीब ज़िद थी कि जिसके नीचे दबा हुआ था । वह अब नहीं है पर उसकी सांसों में प्रकृति सांस ले रही है ।।।

बापू के नाम ...

आदरणीय बापू ! हम सुनते आए थे कि भारत की आत्मा गांधी है। भारत में गांधी नहीं बल्कि गांधी में भारत है । लेकिन अब आपकी आत्मा ने ही आपको मार डाला है । भारत आपको जीवित नहीं रख सका । अ...

प्रतीक्षा में !!!

बहुत दिनों से मैं ऐसी शामों का मुन्तजिर हूं जहां पे शब्दों के दो किनारे मेरी कविता की धारा बन कर तेरी आंखों से बह पड़ें । सड़क पे चलते ख़्याल सारे जिनकी पेशानियों में बल पड़...

कविता मेरी

तुम्हें मालूम है जानां तुम्हें इक नज़्म में लाने को मैं कितने सफर करता हूं ! थके मांदे हुए से शब्द तुम्हारे शहर से जब भी गुजरते हैं बहुत आवाज़ करते हैं । इधर यह आब्ला पाई ख्य...

सफर

वही लम्हे कि जब सोने लगें किसी बेसाख्ता सी शाम की तन्हाईयाँ । नशे में चूर होजायें , तेरी पलकों में उतर आयें , बरस जाएँ यह सब बादल । हवाएं चूड़ियाँ बन कर , तेरे हाथों में बस जायें ।...

एक ख्वाब से आजादी ..

नुकीले ख्वाब थे कुछ बहुत आँखों में चुभ रहे थे रात तकिये के तले रख के , थपकियाँ देकर सुला दिया था उन्हें । चंद बातें थीं जिनके सब मतलब पिछली बारिश में धुल गये थे । कई यादें थीं त...

अपने हिस्से का में !

मैं अपने कमरे में हूं ? या उलझनों के खामोश जज़ीरे में ? जहां सिलवटें पड़ गई हैं ख्यालों में आंखों और खाबों के दरमियान एक तल्ख़ फासला बिखर गया है । बोसीदा होगए हैं सारे तमन्ना...