अंतिम यात्रा
मैं एक आखिरी सफर करूंगा उस रोज़
अपनी उलझी हुई हर एक तमन्ना से परे
तेरी शरमाई हुई आंखों के नशे में छुप कर
आखिरी बार निकल जाऊंगा खुद से बाहर
और चुन लाऊंगा बिखरे हुए सब साज़े अदम
बज उठेंगे सभी सोये हुए रूह के नगमे
एक ही पल में गुज़र जायेंगे हिजरो विसाल
जाग जायेगी रानाई मेरे ख्यालों की
लफ्ज़ हो जाएंगे सावन के दरखतों की तरह
बिजलियां कौंदेंगी पलको की घटा के भीतर
यक बयक खुल जायेंगे सब राज़ तेरी आंखों के
तब मिलेगी मेरे शब्दों को रिदा मानी की
मैं वह आखिरी नज़्म कहूंगा उस रोज़
तेज़ बहती हुई सांसों की लहर पर चढ़ कर
आखिरी बार तेरी रूह के कानों के तले
डाल दूंगा मैं लाया हुआ सब ज़ादे सफर
और सो जाऊंगा लेकर के निशां शब्दों के
कि यह तो मेरे थे , मेरे साथ चले जायेंगे ।।।
नजम
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