नव वर्ष और तुम

नींद के आखिरी पल में
तुम यूं उतर आए हो गोया
पहला अंकुर जो फूटे
बर्फ बर्फ एहसास की परतें
महक जाएं
कोहरे की काली सफेद चादर के पीछे
यूं पढ़ लेता हूं तुम्हें
मानो आंखो के पन्नों पर उकर आए हों
तुम्हारे मज़मून
रोज़ थपकियां देकर
सुला देती हैं तुम्हारी यादें
जगाती हैं इससे पहले कि सूरज की पहली किरण
झांके लिहाफ के अंदर
दिसंबर के गुजरते ही यूं लगता है
सिमट आए हैं वह सारे पल
जिनसे वाबस्ता थे तुम
और तुम्हारी पाकीज़ा हसरतें
इन्हें टांक दिया है
कच्ची धूप की स्याही से
नव वर्ष के सफेद माथे पर ।।।
                           नजम

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